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चुनाव
2009
कांग्रेस
अध्यक्ष
का
भाषण
जनसभा
लखनऊ-उत्तर
प्रदेश
19
अप्रैल,
2009
बुजुर्गो,
बहनो और
भाइयो,
शहर लखनऊ
की इस सर-जमीं
को मैं
प्रणाम करती
हूं- सलाम
करती हूं।
लखनऊ की
कुछ तासीर
ही ऐसी
है, कि
जो एक बार
यहां का
हो जाता
है, वह
ज़िंदगी भर
यही कहता
है 'हम
फ़िदाए लखनऊ
और लखनऊ
हम पर फ़िदा!'
अठारह
सौ सत्तावन
के जंगे-आज़ादी
में जिस
बहादुरी से
लखनऊ के
सारे बाशिंदों
ने एक-जुट
होकर अंग्रेज+ी
हुकूमत का
डटकर मुक़ाबला
किया वह
बेमिसाल है।
आज़ादी की
लड़ाई में
यहां के
देश-भक्तों
की कुर्बानियां
इतिहास के
पन्नों में
सुनहरे अक्षरों
में लिखी
हैं। कुल
मिलाकर मिल-जुलकर
रहने, तमाम
मज+हबों और
तंज+ीमों से
प्यार करने
और साथ-साथ
जीने मरने
की कोई
जि+ंदा और
जांवाद मिसाल
अगर हिंदुस्तान
में है,
तो वह है-
शहर लखनऊ।
तभी तो
गोमती के
किनारे की
इस संस्कृति
को गंगा-जमुनी
तहज+ीब कहते
हैं। मैं
मुबारकबाद
देना चाहती
हूं, इस
नगर के
बाशिंदों
को, जिनकी
वजह से
आज यह शहर
दुनिया भर
में, अपनी
तमीज+, तहज+ीब
और तनासुब
के लिए
जाना जाता
है।
पर कभी
सोचती हूं,
तो दिल
भी दुखता
है इस बात
से, कि
इस भाई-चारे
और एकता
वाले शहर
पर, कभी-कभी
कैसे लोग
अपनी ख़तरनाक
छाया डालने
की कोशिश
करते रहे
हैं।
कभी
धर्म और
मज+हब के
नाम पर
अपनी रोटियां
सेंकने वाले
लोग, इस
शहर को
अपनी सांप्रदायिक
राजनीति से
दूषित करने
की कोशिश
करते हैं,
तो कभी
ऊंच-नीच और
जाति-वर्ग
से इंसानों
को तौलने
वाले लोग,
अपनी जातिवादी
नीतियां यहां
चलाने का
प्रयास करते
हैं। पर
इन सांप्रदायिक
और जातिवादी
लोगों से
मैं साफ़
कह देना
चाहती हूं,
आपकी घिनौनी
राजनीति का
खेल यहां
नहीं चलेगा।
यह लखनऊ
न कभी जाति-धर्म,
तंज+ीम के
नाम पर
बंटा था,
न ही कभी
बंटेगा। यह
एक Secular
शहर था,
है और हमेशा
रहेगा।
जब से यहां
गै+र-कांग्रेसी
पार्टियां
राजनीति कर
रही हैं,
जिस नेता
ने दलितों
का वोट
पाने के
लिए, कुछ
वर्गों के
ख़िलाफ़ अपशब्दों
का इस्तेमाल
कर सियासत
में पैर
जमाने और
समाज को
तोड़ने की
कोशिश की,
वही नेता
आज इन्हीं
वर्गों को
सीढ़ी बनाकर
सत्ता पाने
और उस पर
कायम रहने
की कोशिश
कर रही
हैं। आख़िर
आप कब तक
ऐसे लोगों
के जाल
में फंसे
रहेंगे। दलित
समाज की
भलाई के
लिए संघर्ष
महात्मा गांधी
जी ने,
ज्योतिबा
फुले जी
और बाबा
साहब अंबेडकर
जैसे महान्
लोगों ने
किया था।
उन लोगों
ने अपनी
मूर्तियां
गढ़ाने की
बजाय, एक
नया समाज
गढ़ा था।
आज उत्तर
प्रदेश का
बच्चा-बच्चा
जानता है,
कि यहां
दौलत, लोभ
और लालच
का राज
चल रहा
है। कानून-व्यवस्था
का नाम
ही नहीं
है, जिन
अपराधियों
को जेल
में होना
चाहिए, वे
ठैच् के
उम्मीदवार
हो गये
हैं। राजनीतिक
हत्याएं हो
रही हैं
और सरकार
चुप है।
जाति के
नाम पर
हो रही
राजनीति से
ज़्यादा ख़तरनाक-
धर्म के
नाम पर
हो रही
राजनीति है
और यहां
जो पार्टियां
बरसों से
इस काम
में लगी
हुई हैं,
उन्हें आप
लोग भी
अच्छी तरह
से जानते
हैं। पिछले
दिनों इन्होंने
अपने घोषणा-पत्र
में फिर
से सांप्रदायिकता
को हवा
देने वाली
बातें की
हैं। आज
राम-राज्य
की बात
करने वालों
को मैं
कहना चाहूंगी
कि, राम-राज्य
में भेद-भाव
नहीं होता,
नफ़रत नहीं
होता, दंगे
नहीं होते।
राम-राज्य
तो एक ऐसी
व्यवस्था
है, जिसमें
सबके लिए
न्याय हो,
सबके लिए
संमान हो
और सबके
लिए सुरक्षा
हो।
यहां एक
और पार्टी
है, जो
अपने को
समाजवादी
कहती है,
लेकिन उसकी
असलियत आप
सबको पता
है। हमारी
पार्टी के
साथ उनकी
कभी दोस्ती
है, कभी
दुश्मनी, कभी
तीसरे मोर्चे
के साथ
हैं, कभी
किसी और
के साथ।
कहावत हैः
'पल में
तोला, पल
में मासा।'
वैसे आज-कल
एक के बाद
एक मोर्चा
खुल रहा
है। पर
है, कोई
ऐसा मोर्चा
जो कांग्रेस
की तरह
लगातार ग़रीबी
और बेकारी
के ख़िलाफ़,
पिछड़ेपन और
अशिक्षा के
ख़िलाफ़, सांप्रदायिकता
और आतंक
के ख़िलाफ़,
लड़ाई लड़
सके?
इस तरह
का संघर्ष
हमने पिछले
पांच साल
के दौरान
भी प्रधानमंत्री
डॉ0 मनमोहन
सिंह जी
के नेतृत्व
में किया
है। नरेगा
के द्वारा
ग्रामीण बेरोज़गारों
को रोज़गार,
किसानों का
पैंसठ हज़ार
करोड़ का
कर्ज़ माफ़ी,
गांवों और
शहरों के
बुनियादी
ढांचे को
मज़बूत करना,
अक्लियतों
के लिए
अलग से
मंत्रालय
और सच्चर
कमेटी की
सिफ़ारिशों
पर अमल,
ग़रीब,
दलित, आदिवासी
और पिछड़े
वर्गों के
बच्चों की
बेहतर शिक्षा
का इंतज+ाम
किया है।
सरकारी स्कूलों
में बच्चों
को दोपहर
का भोजन
मिल रहा
है। सड़क,
पानी, बिजली
और आवास
पर विशेष
ध्यान दिया
गया है।
परमाणु करार
किया है।
हमारी प्यारी
बहनें जो
आंगनवाड़ी
में काम
करती हैं,
उनका मानदेय
बढ़ाया है,
दूसरी बहनें
स्वयं सहायता
समूहों के
ज़रिए अपने
बल-बूते आत्म-निर्भर
हो रही
हैं। ऐसे
बहुत से
काम हैं,
जो गिनाए
जा सकते
हैं। इन
सब योजनाओं
के लिए
आपके प्रदेश
को भी करोड़ों-करोड़ों
हज़ार रुपये
दिए गये,
वह कहां
ख़र्च हुआ,
आप यहां
की सरकार
से खुद
पूछिए।
हमारे ऐसे
कार्यक्रमों
और योजनाओं
से परेशान
होकर कुछ
लोग हमारी
पार्टी और
प्रधानमंत्री
डॉ0 मनमोहन
सिंह जी
को निशाना
बना रहे
हैं। कहते
हैं, कि
वह अपने
आप कोई
फ़ैसला नहीं
ले पाते
हैं। जो
लोग अपने
को मज़बूत
नेता कहते
हैं, क्या
ये लोग
अपने मन
और सोच
से कोई
फ़ैसला लेते
हैं या
ले सकते
हैं? किसी
भी फ़ैसले
के लिए
वे एक ख़ास
संगठन की
तरफ़ देखते
हैं, उसके
इशारे पर
चलते हैं,
उसके आदेश
पर चलते
हैं। यहां
तक कि उस
मज़बूत नेता
को उसी
संगठन के
आदेश पर
पार्टी अध्यक्ष
पद से इस्तीफ़ा
देना पड़ा।
अब आप फ़ैसला
करें, कि
कौन मज़बूत
नेता है
और कौन
कमज़ोर? मैं
आपसे स्पष्ट
करना चाहती
हूं, कि
कांग्रेस
पार्टी किसी
संगठन या
व्यक्ति के
इशारे पर
नहीं चलती,
बल्कि आम
आदमी की
इच्छाओं और
उम्मीदों
पर चलती
है।
आतंकवाद के
बारे में
भी हमारे
ऊपर इल्ज़ाम
लगता है।
लेकिन देशवासी
भूले नहीं
हैं, कि
किसके गृहमंत्री
और उप-प्रधानमंत्री
रहते हुए
हमारी संसद्
के अलावा
एक के बाद
एक आतंकवादी
हमले हुए
और पकड़े
गये ख़तरनाक
आतंकवादियों
को जेल
से निकाल
कर मेहमान
की तरह
कंधार किसने
भेजा था?
देशवासी यह
भी जानते
हैं, कि
इंदिरा जी
और राजीव
जी जैसे
कांग्रेस
के महान्
नेताओं ने
देश की
एकता के
लिए अपने
प्राण तक
का बलिदान
किया है।
बहनो
और भाइयो,
इस चुनाव
में आपको
तय करना
है, कि
आप भेद-भाव
का साथ
देंगे या
समानता का,
भाई-चारे का
साथ देंगे
या अलगाववाद
का, विकास
का साथ
देंगे या
विनाश का।
आज सबसे
बड़ी ज़रूरत
देश को
एक स्थायी
और मज़बूत
सरकार की
है, और
वह सिर्फ़
कांग्रेस
पार्टी ही
दे सकती
है। जिसका
नेतृत्व डॉ0
मनमोहन सिंह
जैसे योग्य,
अनुभवी और
ईमानदार व्यक्ति
ही कर सकते
हैं।
लखनऊ एक
संजीदा शहर
है, देश
की राजनीति
में इसका
बहुत महत्वपूर्ण
योगदान होता
है। इसीलिए
यह ज़रूरी
है, कि
एक ऐसा
उम्मीदवार
इस शहर
से जीते,
जो आप सभी
की आशाओं
और आकांक्षाओं
को समझता
हो। ऐसी
ही हैं
रीता बहुगुणा
जोशी जी।
इनके पिता
भ्छ ठंीनहनदं
रप के बारे
में आप
सब जानते
हैं। उन्हीं
की बेटी
रीता जी
आपकी सेवा
के लिए
समर्पित हैं।
मैं आपसे
निवेदन करती
हूं कि
चुनाव के
दिन रीता
जी को लखनऊ
शहर के
सारे लोग
अपना आशीर्वाद
देकर उन्हें
भारी बहुमत
से जिताएं।
इन्हीं शब्दों
के साथ
मैं आप
सबको इस
सभा में
आने के
लिए धन्यवाद
देती हूं।
जय-हिंद।
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