चुनाव 2009

 

कांग्रेस अध्यक्ष का भाषण

जनसभा

जमुई-बिहार

11 अप्रैल, 2009

 

बुजुर्गो, बहनो और भाइयो,

       इतिहास साक्षी है कि जाने कितनी सदियों तक बिहार ज्ञान का, कला का, दर्शन का, अहिंसा और शांति का केंद्र बना रहा है। बिहार की मिट्टी ने देश को जाने कितने स्वतंत्रता सेनानी और आज़ादी के परवाने दिये हैं, वह अठारह सौ सत्तावन हो, कि बीसवीं सदी में गांधी जी की अहिंसावादी जंगे आज़ादी, बिहार के ज़िले हर मोर्चे पर कभी किसी से पीछे नहीं रहे। मैं इस वीरता को प्रणाम करती हूं।

       दुःख होता है, यह देखकर कि जहां युगों तक अहिंसा की परंपरा रही है, वहां हिंसा करने वाले लोग सत्ता के हिस्सेदार बन सकते हैं। जहां युगों तक शांति और एकता के मंत्र गूंजे हैं, वहां नफ़रत और अलगाव फैलाने वाली शक्तियां अपने पैर जमा रही हैं। जहां कभी नालंदा से ज्ञान की ज्योति दुनिया में फैली थी, वहां कुछ लोग अपनी राजनीति से अंधकार ही अंधकार फैला रहे हैं।

       इनमें से कुछ तो ऐसे हैं, जो नफ़रत का यह अंधेरा फैलाने का काम खुल्लम-खुल्ला करते हैं, जैसे भाजपा, और कुछ कहने को Secularism का सिर्फ़ दिखावा कर रहे हैं, मगर काम नफ़रत के व्यापारियों का ही करते हैं।      

       मगर कांग्रेस का इतिहास इनसे बिल्कुल अलग है। कांग्रेस समाज के सभी वर्गों की खुशहाली और तरक़्की के लिए हमेशा से संघर्ष करती रही है, एकता और सद्भावना के लिए संघर्ष करती रही है। अफ़सोस है, कि बिहार पिछले दो दशक के ग़ैर-कांग्रेसी सरकारों के राज में बर्बादी के दौर से गुज़र रहा है।

       जबकि हमारी केंद्र सरकार ने फिर से बिहार की तरफ़ ध्यान दिया है और तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए करोड़ों-करोड़ रुपये दिए हैं, इसके बावजूद उसका असर यहां कहीं भी दिखायी नहीं देता। मिसाल के तौर पर बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए सर्व-शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार ने, सवा दो लाख शिक्षकों की भर्ती के लिए राज्य सरकार को पैसा दिया। तेरह हज़ार स्कूल भवन बनाने का पैसा दिया, लेकिन ये स्कूल भवन कहां बने-- हमें नहीं पता। इसी तरह भारत-निर्माण कार्यक्रम के तहत हमने बिहार के बीस हज़ार गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए राज्य सरकार को पैसा दिया, चौदह लाख इन्दिरा आवास बनाने के लिए पैसा दिया, लेकिन उन पैसों का कहां इस्तेमाल हुआ, आपको इन सबके बारे में सवाल पूछने होंगे राज्य सरकार से।

बहनो और भाइयो,

       आज ज़रूरत है, एक मज़बूत राजनीतिक इच्छा-शक्ति की, एक राजनीतिक विकल्प की, एक ऐसी पार्टी की जिसका दृष्टि-कोण राष्ट्रीय हो, जो जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकता, विकास और सबकी खुशहाली के काम करती हो।    

       आज ज़रूरत है, ऐसे लोगो को पहचानने की, जिन्होंने जनता की भावनाएं भडकायीं, समाज के अलग-अलग वर्गों को गुमराह किया,  जिन्होंने केवल अपने स्वार्थ और कुर्सी के लिए आपस में समझौता किया है।

       एक बात और, आज कल मोर्चे खोलने का एक नया फ़ैशन चला है। तीसरा मोर्चा- तीसरा मोर्चा मैं तो कहती हूं तीसरा क्या, चौथा, पांचवां, छठा मोर्चा भी खुल जाए। पर है कोई जो कांग्रेस की तरह ग़रीबी के ख़िलाफ़, बेकारी के ख़िलाफ़, सांप्रदायिकता और आतंक के ख़िलाफ़, पिछड़ेपन और अशिक्षा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलकर लगातार लड़ाई कर सके? बिल्कुल नहीं है, कोई नहीं है।

       मै पूछना चाहूंगी, कि क्या कार्यक्रम है इनके पास सरकार चलाने के लिए? कुछ नीति है? कुछ दृष्टि है? इनमें कुछ नहीं है, सिवाय कुर्सी, कुछ नहीं है। पहले भी बने हैं ऐसे मोर्चे, सिर्फ़ कांग्रेस के विरोध के नाम पर, सत्ता पाने के लिए। क्या हुआ ऐसे मोर्चों का, आप मुझसे ज़्यादा जानते हैं। बस जितनी पार्टी उतने नेता, जितने नेता उतने ही प्रधानमंत्री। आप और हम सब जानते हैं, कि देश इस तरह नहीं चलता।

       हमारे प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह जी एक ऐसे नेता हैं, जिनके पास योग्यता, अनुभव और काबिलियत है, जिनकी संतुलित और दूर-दर्शी विचार-धारा है, जो निष्ठा और समर्पण के साथ सबको साथ लेकर एक मज़बूत, एक स्थिर सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं।

       कांग्रेस के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नरेगा जैसा कानून बनाकर रोज़गार का कानूनी अधिकार दिया है। मुझे यह कहते हुए खुशी है, कि पिछले पांच वर्षो में चार करोड़ से ज़्यादा परिवारों को इस कानून से फ़ायदा हुआ। किसान हमारा अन्नदाता है और उसके दुःख-तक़लीफ़ को समझना और दूर करना हमारी ज़िम्मेदारी है। इसीलिए हमारी सरकार ने किसानों के पैंसठ हज़ार करोड़ के कर्ज़े माफ़ किए हैं। आदिवासी भाई-बहनों के लिए जंगल की ज़मीन और उपज पर अधिकार का कानून बनाया। असंगठित क्षेत्र के मज़दूर भाई-बहनों के लिए बीमा योजना, वृद्धावस्था पेंशन योजना के अलावा उनके हक़ में भी कानून पास किया है। अक्लियतों के लिए एक ख़ास मंत्रालय और सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशों पर अमल हो रहा है। हमें संतोष है, कि पिछले पांच वर्षों में हमने दलित, आदिवासी, पिछड़े, अक्लियत, महिलाओं और दूसरे ग़रीब और कमज़ोर वर्गों के हित में, अनेक ऐतिहासिक क़दम उठाए हैं, नये कानून तक बनाए हैं।

 

भाइयो और बहनो,

       पिछले दस-पंद्रह वर्षो में, बिहार का जो हाल हुआ है, उसे आप खुद महसूस कर रहे हैं। राज्य सरकार की जितनी आलोचना की जाए, वह कम है। उनके गठबंधन का नेता जिनकी पुरानी आदत कांग्रेस पार्टी पर उंगली उठाने की है और जो आज कल हमारे प्रधानमंत्री पर हर तरह के ग़लत इल्ज़ाम लगा रहे हैं, उनकी क्या सफलताएं हैं? उनके भाजपा-NDA शासन के दौरान जब गृहमंत्री, उप-प्रधानमंत्री थे, आपको याद होगा, क्या हुआ, संसद् भवन, जम्मू-कश्मीर असेम्बली, रघुनाथ मंदिर के साथ-साथ एक के बाद एक आतंकवादी हमले हुए और कैसे अपने आपको आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में काबिल नेता समझते हैं?

बहनो और भाइयो,

       जो वादे हमारी पार्टी ने आपसे पांच बरस पहले किए थे, उनमें से ज़्यादातर पूरे हुए हैं और, हमने देश की मज़बूती और तरक़्की के लिए पूरी ताक़त के साथ काम किया है। देश में उम्मीदों का एक नया वातावरण बना है।

       आज मैं फिर आप सबका आवाहन करती हूं, कि कांगे्रस को मज़बूत करें, उसकी शुरुआत जमुई से करें। अशोक चौधरी के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के सभी उम्मीदवारों को भारी बहुमत से जिताएं, बिहार की राजनीति को एक राष्ट्रीय स्वरूप दें। कांग्रेस के साथ क़दम से क़दम मिलाकर देश के विकास में भागीदार बनें।

       इन्हीं शब्दों के साथ मै आप सबको इस सभा में आने के लिए धन्यवाद देती हूँ। 

       जय-हिन्द।

 

 


 
 

 

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