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चुनाव 2009
कांग्रेस अध्यक्ष का
भाषण
जनसभा
दावणगेरे-कर्नाटक
23 मार्च, 2009
बुजुर्गो, बहनो और
भाइयो,
मुझे खुशी है,
कि मैं इस महान् धरती कर्नाटक में चुनाव की पहली सभा के लिए आपके बीच
आयी हूं। इस धरती का इतिहास, यहां की संस्कृति, साहित्य, परंपराएं,
त्याग और बलिदान सारे देश के लिए गर्व की बात है।
कर्नाटक और
दक्षिण के दूसरे राज्यों ने शुरू से ही ज़्यादातर कांग्रेस का ही
समर्थन किया है। कांग्रेस ने भी आपकी प्रगति और विकास के लिए हमेशा
संघर्ष किया है।
एक ज़माने में
दावणगेरे का वस्त्र-उद्योग दूर-दूर तक जाना जाता था, आज किसानों की
मेहनत, कृषि उद्योग और यहां की शिक्षण संस्थाओं का नाम सारे देश में
है। Information Technology के क्षेत्र में कर्नाटक के योगदान को न
केवल सारा देश, बल्कि सारी दुनिया जानती है, आपकी उपलब्धियों पर देश
गर्व करता है।
यह प्रगति इसलिए
संभव हुई, क्योंकि कर्नाटक के लोग अमन-चैन, भाई-चारा और सद्भावना की
संस्कृति का पालन करते थे। प्रगति और विकास- शांति और सद्भावना के
वातावरण में ही होते हैं। अफ़सोस की बात यह है, कि इधर कुछ समय से इस
महान् प्रदेश में इन सब उसूलों के लिए ख़तरा पैदा हो गया है।
अब यहां आपसी प्रेम और
भाई-चारे की जगह, नफ़रत और तानाशाही के बीज बोए जा रहे हैं, लोगों की
निजी ज़िंदगी में दख़ल देने की कोशिश हो रही है। सांप्रदायिक तत्व यहां
सारी सीमाएं पार कर रहे हैं। ऐसा लगता है, कि हुकूमत से जुड़े हुए लोगों
के दिल में लोकतंत्र और निजी ज़िंदगी की, हमारी बुनियादी आज़ादी के लिए
कोई जगह नहीं है। आज कर्नाटक में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर महान्
संत बास-वन्ना जी की आत्मा को कितना दुःख होता होगा। यहां के महान्
सूफ़ी संतों ने इसकी शिक्षा नहीं दी थी। संगीत-कार और संत कनक-दास जी की
यह परंपरा नहीं है। इसलिए सांप्रदायिकता का ज़हर फैलाने वाले तत्वों से
कांग्रेस का हमेशा विरोध रहा है।
कांग्रेस उन सभी
ताक़तों के ख़िलाफ़ है, जो समाज की एकता के लिए ख़तरा हैं। सामाजिक एकता ही
राष्ट्रीय एकता है। राष्ट्रीय एकता के बिना, देश की ताक़त नहीं बढ़ती।
हमारा देश मज़बूत है, तो हम दुनिया के सामने इज़्ज़त के साथ सिर उठाकर
खड़े हो सकते हैं और किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
बहनो और भाइयो,
अब फ़ैसला करने
का समय है, हम देश में किस तरह की राजनीति चाहते हैं? आपके सामने एक
तरफ़ हमारी कांग्रेस पार्टी जो अपने नेतृत्व में UPA सरकार के पांच
साल के कामों के आधार पर, आपका समर्थन मांग रही है और दूसरी तरफ़ भाजपा
और NDA के लोग हैं, जिनके कुशासन के कारण, पांच साल पहले देश में समाज
के सभी वर्गों के लोग दुखी और परेशान थे।
सिर्फ़ कुछ ख़ास लोगों
की जेबें भरने का काम हो रहा था। इधर कई वर्षों से यही दशा कर्नाटक में
भी है। चारो तरफ़ भ्रष्टाचार है। कानून और व्यवस्था ख़त्म हो गयी है। लगता
है, सिर्फ़ पैसे के बल पर शासन चल रहा है। यहां की प्राकृतिक दौलत को
नष्ट ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसे कौन कितना लूट सके, इसमें
ज़बरदस्त होड़ लगी है। इस तरह के राज को लोग कैसे बर्दाश्त कर सकते
हैं?
सुनते हैं एक और
मोर्चा बन रहा है। उसमें जिन पार्टियों के शामिल होने की चर्चा है, कौन
जाने कि- कब, कौन, कहां और किसके साथ खड़ा होगा। जितनी पार्टियां, उतने
ही प्रधानमंत्री।
देश इस तरह नहीं
चलता। देश इस तरह आगे नहीं बढ़ता। देश की शक्ति के लिए, राजनीतिक
स्थिरता के लिए, मज़बूत सरकार चाहिए, दूर-दर्शी नेतृत्व चाहिए, अनुभव,
योग्यता और ईमानदारी चाहिए। पिछले पांच वर्षों में हमारी UPA सरकार
ने डॉ0 मनमोहन सिंह जी, जैसे योग्य और ईमानदार व्यक्ति के नेतृत्व में
इन्हीं गुणों के आधार पर, देश की सेवा की है और देश का नाम रोशन किया
है।
आधुनिक भारत की
राजनीति इस बात का प्रमाण है, कि केंद्र या प्रदेशों में जब-जब
कांग्रेस-विरोधी पार्टियों की सरकारें बनी हैं, उन्होंने मज़बूती,
प्रगति और विकास की जगह, चारो तरफ़- कमज़ोरी, पिछड़ापन और बिखराव का
माहौल बनाया। इसकी सीधी वजह है, कि इन पार्टियों ने आपकी तरक़्की और
खुशहाली से ज़्यादा महत्व, अपने निजी स्वार्थ को दिया है।
इनके मन में आपकी
खुशहाली और तरक़्की के लिए कोई जगह नहीं है, देश का नया इतिहास बनाने
की कोई सोच नहीं है, निष्ठा के साथ आपकी सेवा करने की भावना नहीं है।
जवाहरलाल नेहरू से लेकर आज तक हमारे नेताओं के मन में सिर्फ़ लोगों की
सेवा की भावना थी और वे देश के लिए ही जिए और मरे। आज हम भी उसी भावना
से, उन्हीं आदर्शों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हम बे-हिचक कह
सकते हैं, कि पिछले पांच वर्षों में हमारी केंद्र की UPA सरकार ने
अनेक ऐतिहासिक काम किए हैं। भारत-निर्माण जैसी बड़ी योजना के ज़रिए बिजली,
पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य- सभी क्षेत्रों में सारे देश में अनेक
काम हो रहे हैं। विकास का नया बुनियादी ढांचा बन रहा है। राष्ट्रीय
ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार
उपलब्ध कराया जा रहा है। आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्गों और बच्चियों के
लिए शिक्षा और Scholarship की सुविधाएं, स्कूलों में पंद्रह करोड़ ग़रीब
बच्चों को दोपहर का भोजन मिल रहा है। देश भर के युवाओं को उच्च शिक्षा
के लिए विश्व-विद्यालय, च्वसलजमबीदपबए IIT और प्प्ड खोले जाने जैसे
क्रांतिकारी क़दम उठाए गये हैं। अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए तमाम
योजनाएं शुरू की गयी हैं। परमाणु करार भी किया है।
किसान हमारे
अन्नदाता ही नहीं, बल्कि जीवन-दाता हैं। उनकी परेशानियों को देखकर हमने
इकहत्तर हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ माफ़ कर उन्हें और उनके परिवारों को
एक नया जीवन दिया।
हमारी प्यारी बहनों की
रक्षा के लिए कानून और स्वयं-सहायता समूहों के ज़रिए आत्म-निर्भर बनाया
जा रहा है। इस तरह के बहुत से ऐसे काम हैं, उपलब्धियां हैं, जो गिनायी
जा सकती हैं।
लेकिन हमारे
सामने चुनौतियां भी बहुत हैं। हमारी प्रगति से कुछ लोगों के मन में जलन
होती है। वे तरह-तरह की बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें करते हैं। आतंकवाद
भी एक ऐसी ही कोशिश है, चुनौती है। हम भाजपा जैसे नहीं हैं, कि हमारी
जेलों में बंद आतंकवादियों को मेहमानों की तरह अफ़गानिस्तान ले जाकर
छोडे+ं। हमारी वही पार्टी है, जिसके नेताओं इंदिरा जी और राजीव जी देश
के लिए, देश की एकता के लिए शहीद हुए। हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में
पूरी तरह सक्षम हैं।
बहनो और भाइयो,
राजनीतिक
पार्टियों और रकारों को अपने उसूलों के आधार पर, अपने कामों के आधार पर
जनता से समर्थन मांगना चाहिए। हम उनमें से नहीं हैं, जो लोगों की
भावनाएं भड़काकर समाज में भेद-भाव का ज़हर घोलकर अपनी कुर्सी के लिए
समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। हमें अपने उसूलों, अपने कामों के
आधार पर आपका समर्थन चाहिए। हमें अपनी निष्ठा और सेवा के आधार पर आपका
समर्थन चाहिए।
लोकतंत्र में
चुनाव का समय कितना महत्वपूर्ण है, ख़ास कर सबसे बड़ी पंचायत लोक-सभा का
चुनाव, आप सबको इसका एहसास होगा।
इस चुनाव का जो भी
नतीजा होगा, उसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ेगा, एक-एक आदमी की
ज़िंदगी पर पड़ेगा।
यह चुनाव केंद्र
में एक स्थायी सरकार बनाने के लिए है, देश का उज्ज्वल भविष्य बनाने के
लिए है। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है, कि इन सब बातों को ध्यान में रखकर
फ़ैसला करें, अपना एक-एक वोट कांग्रेस को देकर, देश और कर्नाटक का
भविष्य उज्ज्वल बनाएं।
इन्हीं शब्दों
के साथ मैं आप सबको इस सभा में आने के लिए धन्यवाद देती हूं।
जय-हिंद।
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