| आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधी, अध्यक्ष संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के भाषण का मुख्य अंश महात्मा गांधी नरेगा मेला विज्ञान भवन-नयी दिल्ली 2 फरवरी, 2010 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम की चौथी वर्ष-गांठ के अवसर पर आप सबके बीच आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज़ाद भारत के इतिहास में सामाजिक सुरक्षा की नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने की दिशा में, महात्मा गांधी नरेगा का बहुत ही ऊंचा स्थान है। कई मायने में यह योजना सबसे ग़रीब और कमज़ोर तबकों के प्रति हमारे संकल्प का बेमिसाल नमूना है। इस योजना को कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों की बुनियाद पर बनाया गया है। भारत के हाल के इतिहास में इसका लागू होना, बिना किसी संदेह, हमारी एक बड़ी उपलब्धि है। महात्मा गांधी नरेगा की रूप-रेखा तब तैयार की गयी थी, जब हम विपक्ष में थे। वर्ष दो हज़ार दो में गोहाटी में कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के संमेलन में इस विचार की शुरुआत हुई और अनेक पार्टी बैठकों में चर्चा के बाद, इसे ठोस रूप दिया गया। हमने यह महसूस किया, कि ग्रामीण रोज़गार के बारे में नये सिरे से विचार करने की ज़रूरत है, ख़ासकर सबसे ग़रीब और सबसे ज़्यादा वंचितों के लिए। हमें एक ऐसी योजना बनानी थी, जो उन्हें कम से कम रोज़गार और आमदनी की गारंटी सुनिश्चित करे। यह विचार ज़ोर पकड़ने लगा और दो हज़ार चार के हमारे घोषणा-पत्र में इसे पूरा करने का वादा किया गया। हमें मालूम था, कि बाधाओं और आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा और यह एक चुनौती होगी। लेकिन ऐसी चुनौती को स्वीकार करना हमारे लिए गर्व का विषय था। प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में यूपीए के पहले कार्य-काल के दौरान हमने इस योजना को शुरू करके अपना वादा पूरा किया। पहले इसको कुछ ख़ास ज़िलों में लागू किया गया, उसके बाद पूरे देश में। मुझे खूब याद है, कि जब मैं इस विधेयक के समर्थन में, दो हज़ार पांच में, लोक-सभा में बोल रही थी, तब इसके समर्थन और विरोध में-- दोनों तरह की आवाज़ें उठ रही थीं। लेकिन इस विधेयक के प्रति हमारा विश्वास अडिग रहा। उसके बाद जिस तरह सभी राजनीतिक दलों ने अपने राजनीतिक विश्वासों से ऊपर उठकर इसकी एक स्वर से प्रशंसा की और इसे लागू किया, यह बेहद संतोष की बात है। सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के रूप में इस योजना की सफलता इसी बात का जीता-जागता प्रमाण है। हमारी सरकार ने यह तय किया है, कि सहकारी संघीय प्रणाली की भावना के अनुरूप इसकी सफलता से सभी राज्यों के हित जुड़े रहें। यह सही है, कि महात्मा गांधी नरेगा में कांग्रेस पार्टी की विचार-धारा की तस्वीर है, लेकिन हमें यह भी अवश्य याद रखना चाहिए, कि यह इसीलिए संभव हो सका कि, हमने पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी के साथ आर्थिक विकास किया है। इसी आर्थिक विकास के कारण ही हम इस योजना को लागू करने के लिए, पिछले चार वर्षों के दौरान पचहत्तर हज़ार करोड़ रुपये की राशि देने के संसाधन जुटा सके। महात्मा गांधी नरेगा का एक सबसे प्रशंसा योग्य पक्ष यह है, कि इसके लागू होने का दूरगामी और व्यापक परिणाम हुआ है। इसके कारण मजबूरी में मज़दूरों का पलायन रुका है, क्योंकि उन्हें जहां रहते हैं, वहीं आर्थिक ज़रूरतें पूरी करने का अवसर और रोज़गार का बेहतर विकल्प मिला है। इस योजना से ग़रीबों को मिलने वाली मज़दूरी में बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से उनका-- ख़ासकर असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों का शोषण कम हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को बल मिला है, क्योंकि महिलाओं को भी परिवार का मुखिया नामांकित करने और उनके नाम से जॉब-कार्ड जारी करने का प्रावधान किया गया है। पूरे ग्रामीण भारत के डाक-घरों में लाखों खाते खोलकर उनकी मज़दूरी सीधे जमा की जा रही है। इससे वित्तीय-निवेश में सुधार आया है। इस योजना ने हमारी पंचायत-राज संस्थाओं को केंद्रीय भूमिका देकर उन्हें वित्तीय और प्रशासनिक-- दोनों तरह से सशक्त किया है, क्योंकि वे सामाजिक लेखा-जांच करवाकर ज़िम्मेदारी सुनिश्चित करवा सकते हैं। पारदर्शिता निर्धारित करने में सामाजिक लेखा-जांच न केवल एक शक्तिशाली साधन बन गया है, बल्कि यह दूसरे विकास कार्यक्रमों के लिए भी एक मिसाल का काम कर रही है। लेकिन हम अपनी तारीफ़ों से संतुष्ट होकर चैन की सांस नहीं ले सकते। आज महात्मा गांधी नरेगा योजना अच्छा काम कर रही है। लेकिन इसमें अब भी समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है। लापता या झूठे जॉब-कार्ड, आधे-अधूरे कवरेज, कम मज़दूरी देने और कारगर निगरानी न होने के मामले, अभी भी सामने आ रहे हैं। काम मांगने की अर्ज़ी की पावती न देने की वजह से बेरोज़गारी भत्ता देने और ज़िम्मेदारी तय करने का, कानूनी प्रावधान ठीक से लागू नहीं हो पा रहा है। इन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। इन चुनौतियों का हमें डटकर सामना करना होगा, महात्मा गांधी नरेगा को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करना होगा। तभी यह योजना अपनी पूरी क्षमता प्राप्त कर सकेगी। अंत में, महात्मा गांधी नरेगा की सफलता में जिनके योगदान को सबने स्वीकार किया है, मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देती हूं, और इस योजना में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जिन्हें पुरस्कार दिया गया है, मैं उन सभी को बधाई देती हूं। मेरा विश्वास है, कि यह पुरस्कार इस विशाल योजना में प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का माध्यम होगा, जिससे वे, और कारगर तरीक़े से इसे लागू करने के लिए, निष्ठा के साथ कठोर परिश्रम करेंगे। इसी के साथ मैं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ0 सी0पी0 जोशी और, उनके मंत्रालय के अधिकारियों को इसकी सफलता में उनके अथक प्रयासों और उनकी निष्ठा की प्रशंसा करती हूं। |