भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

125वां स्थापना-दिवस समारोह एवं

पार्टी के नये भवन का शिलान्यास

नयी दिल्ली

28 दिसम्बर 2009

 

कांग्रेस अध्यक्ष का भाषण

 

डॉ. मनमोहन सिंह जी,

आदरणीय स्वाधीनता सेनानीगण,

प्रणब जी,

एंटनी जी,

वोरा जी,

शीला दीक्षित जी,

जनार्दन द्विवेदी जी,

मुकुल वासनिक जी,

जय प्रकाश अग्रवाल जी,

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य, मंत्रीगण, संसद सदस्य,

दिल्ली के सभी कांग्रेसजन,

बुजुर्गो, बहनो और भाइयो,

 

I

 

आज हम यहां अपने महान् संगठन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सौ पच्चीसवें वर्ष के समारोहों की शुरुआत करने के लिए इकट्ठा हुए हैं।

       

अगले एक साल हम अपने शानदार इतिहास की ओर मुड़कर देखेंगे और उससे नयी प्रेरणा लेंगे। हम अपनी मूल-शक्ति के उन स्रोतों को खोजने की कोशिश करेंगे, जिनकी वजह से हमारी पार्टी ने देश के सामने आने वाली चुनौतियों का कामयाबी के साथ मुक़ाबला किया है।

 

अगले एक साल हम अपने असाधारण पूर्वजों को याद करेंगे, जिनके त्याग और योगदान के बिना हम वहां नहीं होते, जहां आज हैं। हम अपने पूर्वजों से जुड़ी उन घटनाओं का स्मरण करेंगे, जिनकी वजह से आज के भारत की नयी तस्वीर बनी है और जिन घटनाओं ने, देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है।

 

II

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने हमेशा एक Secular, लोकतांत्रिक, न्याय-पूर्ण और सबको साथ लेकर चलने वाले भारत की नुमाइन्दगी की है। एक ऐसा भारत, जो वंचितों और उन सबका सशक्तिकरण कर रहा है, जिनके साथ भेद-भाव हुआ है, एक ऐसा भारत, जो परंपरा को आधुनिकता से जोड़ता है और, अपने देश की तमाम अनेकताओं के बीच एकता की स्थापना करता है।

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक ऐसा जन-आंदोलन रही है, जिसने एक साम्राज्यवादी शासन से हमें आज़ादी दिलायी, इसी के साथ वह ऐसा जन-आंदोलन बनी, जो अपने देशवासियों की सामाजिक, आर्थिक और निजी आज़ादी के लिए समर्पित है।

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधुनिक भारत की एक राष्ट्र के रूप में बुनियाद रखी। कांग्रेस वह शक्ति है, जिसने एक ऐसे सृदृढ़ और एकता-पूर्ण भारत का विचार और, मज़बूत ताना-बाना तैयार किया, एक ऐसा भारत, जो आत्म-विश्वास के साथ यह जानता है, कि दुनिया में उसकी एक ख़ास जगह है।

 

III

 

हमारा अतीत देश के सार्वजनिक जीवन के केंद्र में हमारी जगह का दस्तावेज़ और वसीयत-नामा है, 

 

हमारा यह सौभाग्य है, कि कांग्रेस का नेतृत्व ऐसे पुरुषों और महिलाओं ने किया, जो साहस, ईमानदारी, दूर-दर्शिता और समर्पण में बेजोड़ थे, उन्होंने हमें हर संकट और संदेह के समय सच्चा और सही रास्ता दिखाया।

 

महात्मा गांधी ने करोड़ों देश-वासियों के दिलों में, बिना हिंसा के और अंतरात्मा को दबाए बिना स्वराज की लौ जलायी। गांधी जी शक्ति के एक ऐसे स्तंभ थे, जिनके अहिंसा के प्रति संकल्प और समर्पण ने एक साम्राज्य को हिला दिया।

 

उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सुधार और परिवर्तन की एक नयी लहर पैदा की, वे अपने आस-पास असामान्य व्यक्तियों की एक ऐसी लंबी कतार इकट्ठा किए, जो आज हमारे स्वाधीनता आंदोलन के जग-मगाते सितारे हैं और जिनके बेमिसाल कामों ने, हमारे स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में, अपनी-अपनी अलग जगह बनायी।

 

आज़ादी के बाद जवाहरलाल नेहरू ने संसदीय लोकतंत्र, Secularism, आर्थिक योजनाओं और वैज्ञानिक दृष्टि के प्रति अपने संकल्प से स्वाधीन भारत को सबसे अधिक प्रभावित किया और उसे एक नया स्वरूप दिया, उन्होंने दुनिया के मामलों में भारत को एक ख़ास महत्व और जगह दिलायी और गुट-निरपेक्ष आंदोलन को दुनिया में एक शक्ति के रूप में खड़ा किया। अगर हम उन्नीस सौ सैंतालीस के बाद बहुत से तूफ़ान झेल पाए हैं, तो वह ज़्‍यादातर उन्हीं के नेतृत्व के कारण संभव हुआ। सरदार पटेल और मौलाना आज़ादी और देश के हर कोने के तमाम साथियों के साथ उन्होंने आज के भारत की एक मज़बूत, जीवंत और आत्म-निर्भर बुनियाद डाली।

 

इसके बाद शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने, उन्हें सिर्फ़ डेढ़ साल का समय मिला, लेकिन उनके योगदान और 'जय-जवान, जय-किसान' जैसे नारे को हम आज भी याद करते हैं।

 

अभी हम लोगों के समय में आज की कांग्रेस को अगर किसी ने सबसे ज़्‍यादा प्रभावित किया, तो वह इंदिरा गांधी जी थीं।

 

उन्होंने अपने आस-पास के निहित स्वार्थों की परवाह किए बिना अपने क़दम बढ़ाए, ताक़तवर देशों के दबाव को नज़रंदाज करते हुए अपने देश की सीमाओं और हितों की रक्षा की। ग़रीब और वंचित की ज़बान बनीं और देशवासियों का आत्म-संमान कायम रखा। अपने देश और देशवासियों के लिए उनके दिल में जो प्यार था, उसी की बदौलत हिम्मत के साथ देश का नेतृत्व किया।

 

आज जब हम एक सौ पच्चीसवें वर्ष में समारोहों की शुरुआत कर रहे हैं, तो यह उचित होगा, कि हम कांग्रेस-शताब्दी के मौक़े पर राजीव जी के भाषण को याद करें। उनका वह भाषण कई मायने में ख़ास है,  लेकिन उसमें उन्होंने इक्कीसवीं सदी के भारत की जो परिकल्पना रखी, उससे वह ऐतिहासिक हो गया है।

 

राजीव जी को बहुत थोड़ा वक़्‍त मिला था, लेकिन उसमें भी उनकी उपलब्धियां बहुत अधिक हैं। उन्होंने देश के कोने-कोने को खुद अपनी आंखों से देखा, और प्रत्येक क्षेत्र, समूह और कहना चाहिए, कि हर भारत-वासी की इच्छाओं और आकांक्षाओं को जानने का प्रयास किया। देश की युवा-शक्ति को पहचाना और उसे राष्ट्र के काम में लगाने की शुरुआत की। यह साधारण बात नहीं है, कि उन्होंने देश के कई अशांत क्षेत्रों में शांति की स्थापना की।

 

राजीव जी ने लोकतंत्र की बुनियाद, पंचायत और नगर-पालिकाओं को देश की व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने के लिए अथक काम किया। विज्ञान और तकनीक की क्षमता पर उन्हें ज़बर्दस्त भरोसा था, लेकिन वे उसे ग़रीब, वंचित और आम आदमी की ज़रूरतें पूरी करने का साधन मानते थे। उन्होंने देश में संचार-क्रांति का आरंभ किया, जिसने हमारे युवाओं के लिए अनेक अवसर प्रदान किए हैं।

 

राजीव जी अपने सपनों को साकार होते देखने के लिए हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उन्नीस सौ इक्यानबे के घोषणा-पत्र में हम उनकी निजी छाप देख सकते हैं। वही उसके बाद के पांच वर्षों में हमारी आर्थिक नीतियों का आधार बना। इन्हीं नीतियों ने हमारी अर्थ-व्यवस्था और समाज को नयी शक्ति और दिशा दी।

 

इसके बाद के वर्षों में हमारी पार्टी के इतिहास में काफ़ी मुश्किल समय आया। यहां तक कि पार्टी के अस्तित्व पर भी सवाल उठने लगा। लेकिन हम आगे बढ़े, हमने अपने बुनियादी मूल्यों को नहीं छोड़ा और सभी कठिन बाधाओं को पार किया। अपनी लगन और कड़ी मेहनत से हमने दो हज़ार चार और दो हज़ार नौ का जनादेश प्राप्त किया। तबसे डॉ० मनमोहन सिंह जी प्रतिभा और योग्यता के साथ सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। देश और दुनिया में इज्ज़त बढ़ रही है।

 

एक बात मैं पूरे विश्वास से कह सकती हूं, कि कांग्रेस की सफलता में हमारे कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी भूमिका है। उनकी बहादुरी निष्ठा, सहयोग और संघर्ष के बल पर ही हमारा यह महान् संगठन इतनी बड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचा है।

 

IV

 

इसी तरह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का देश की जनता के साथ एक बेमिसाल रिश्ता और आपसी समझ है। हम कह सकते हैं,  कि कांग्रेस उनकी आकांक्षाओं का दर्पण है। कांग्रेस की नीतियों में उनकी आशाएं झलकती हैं और हमारे प्रयासों से वे पूरी होती हैं। हमें समाज के सभी वर्गों से ज़बर्दस्त जन-समर्थन और प्यार मिला है।

 

देश-वासियों के साथ यही रिश्ता हमारे अस्तित्व की बुनियाद है और यही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है। इस एक सौ पच्चीसवें वर्ष में हमें अपने कामों के ज़रिए नये सिरे से साबित करना है कि,  कांग्रेस सिर्फ़ देशवासियों के लिए है और देशवासी केवल कांग्रेस की तरफ़ देखते हैं।

 

इसके लिए हमें गांवों,  मुहल्लों और कस्बों में जाकर यह देखना है, कि लोग क्या महसूस करते हैं! हमें अपनी पार्टी का संदेश उन तक पहुंचाना है, सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी देनी है और जहां कहीं भी मुश्किलें हैं, उन्हें दूर करने के लिए संघर्ष करना है।

 

ये सब काम बिना स्वार्थ की भावना से होने चाहिए। यह सिर्फ़ चुनाव के लिए नहीं है, सच्ची सेवा के लिए होना चाहिए।

 

V

 

जैसा कि मैंने शुरू में भी कहा, अगला एक वर्ष हमारे लिए एक नये संकल्प और समर्पण का वर्ष है। यह अतीत में देखकर, भविष्य में आगे क़दम बढ़ाने का वर्ष है।

 

हमारे नेताओं ने हमको जो कुछ विरासत में दिया है, वह बहुत क़ीमती है।

 

अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है, कि हम उस विरासत की देख-भाल करें, उस नींव पर नया निर्माण करें और अपनी पार्टी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ें।

 

इन्हीं शब्दों के साथ आप सबको नये वर्ष की शुभकामनाएं और धन्यवाद देती हूं।

 

जय-हिंद।

 

 


 

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