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चुनाव
2009
कांग्रेस
अध्यक्ष
का
भाषण
जनसभा
चिकोडी-कर्नाटक
15
अप्रैल,
2009
बुजुर्गो,
बहनो और
भाइयो,
इस महान्
धरती पर
आप सबके
बीच आकर
मुझे खुशी
का अनुभव
हो रहा
है।
एक ज़माने
में कर्नाटक
के किसानों
की मेहनत,
कृषि, उद्योग
और यहां
की शिक्षण
संस्थाओं
का नाम
सारे देश
में था।
Information
Technology
के क्षेत्र
में कर्नाटक
के योगदान
को न केवल
सारा देश,
बल्कि सारी
दुनिया जानती
है।
यह प्रगति
इसलिए संभव
हुई, क्योंकि
कर्नाटक के
लोग अमन-चैन,
भाई-चारा और
सद्भावना
की संस्कृति
का पालन
करते थे।
प्रगति और
विकास- शांति
और सद्भावना
के वातावरण
में ही
होते हैं।
अफ़सोस की
बात यह
है, कि
इधर कुछ
समय से
इस महान्
प्रदेश में
इन सब उसूलों
के लिए
ख़तरा पैदा
हो गया
है। अब
यहां आपसी
प्रेम और
भाई-चारे की
जगह, नफ़रत
और तानाशाही
के बीज
बोए जा
रहे हैं।
सांप्रदायिक
तत्व यहां
सारी सीमाएं
पार कर
रहे हैं।
ऐसा लगता
है, कि
हुकूमत से
जुड़े हुए
लोगों के
दिल में
लोकतंत्र
और हमारी
बुनियादी
आज़ादी के
लिए कोई
जगह नहीं
है।
बहनो
और भाइयो,
अब फ़ैसला
करने का
समय है,
हम देश
में किस
तरह की
राजनीति चाहते
हैं? आपके
सामने एक
तरफ़ हमारी
कांग्रेस
पार्टी जो
अपने पांच
साल के
कामों के
आधार पर,
आपका समर्थन
मांग रही
है और दूसरी
तरफ़ भाजपा
और NDA
के लोग
हैं, जिनके
कुशासन के
कारण, पांच
साल पहले
देश में
समाज के
सभी वर्गों
के लोग
दुखी और
परेशान थे।
सिर्फ़ कुछ
ख़ास लोगों
की जेबें
भरने का
काम हो
रहा था।
इधर कई
वर्षों से
यही दशा
कर्नाटक में
भी है।
चारो तरफ़
भ्रष्टाचार
है। कानून
और व्यवस्था
ख़त्म हो
गयी है।
लगता है,
सिर्फ़ पैसे
के बल पर
शासन चल
रहा है।
यहां की
प्राकृतिक
दौलत को
नष्ट किया
जा रहा
है, एक
होड़ मची
है, कि
उसे कौन
कितना लूट
सके। इस
तरह के
राज को
लोग कैसे
बर्दाश्त
कर सकते
हैं?
पिछले पांच
वर्षों में
हमारी सरकार
ने डॉ0
मनमोहन सिंह
जी, जैसे
योग्य और
ईमानदार व्यक्ति
के नेतृत्व
में इन्हीं
गुणों के
आधार पर,
देश की
सेवा की
है और देश
का नाम
रोशन किया
है।
केंद्र या
प्रदेशों
में जब-जब
कांग्रेस-विरोधी
पार्टियों
की सरकारें
बनी हैं,
उन्होंने
मज़बूती, प्रगति
और विकास
की जगह,
चारो तरफ़-
कमज़ोरी, पिछड़ापन
और बिखराव
का माहौल
बनाया। इसकी
सीधी वजह
है, कि
इन पार्टियों
ने आपकी
तरक़्की और
खुशहाली से
ज़्यादा महत्व,
अपने निजी
स्वार्थ को
दिया है।
इनके मन
में आपकी
सेवा करने
की भावना
नहीं है।
जवाहरलाल
नेहरू से
लेकर आज
तक हमारे
नेताओं के
मन में
सिर्फ़ लोगों
की सेवा
की भावना
थी और वे
देश के
लिए ही
जिए और
मरे। आज
हम भी उसी
भावना से,
उन्हीं आदर्शों
के लिए
संघर्ष कर
रहे हैं।
हम बे-हिचक
कह सकते
हैं, कि
पिछले पांच
वर्षों में
हमने अनेक
ऐतिहासिक
काम किए
हैं। भारत-निर्माण
जैसी बड़ी
योजना के
ज़रिए बिजली,
पानी, सड़क,
शिक्षा, स्वास्थ्य-
सभी क्षेत्रों
में सारे
देश में
अनेक काम
हो रहे
हैं। विकास
का नया
बुनियादी
ढांचा बन
रहा है।
राष्ट्रीय
ग्रामीण रोज़गार
गारंटी योजना
द्वारा ग्रामीण
क्षेत्रों
में रोज़गार
उपलब्ध कराया
जा रहा
है। आदिवासी,
दलित, पिछड़े
वर्गों और
बच्चियों
के लिए
शिक्षा और
Scholarship
की सुविधाएं,
स्कूलों में
पंद्रह करोड़
ग़रीब बच्चों
को दोपहर
का भोजन
मिल रहा
है।
देश
भर के युवाओं
को उच्च
शिक्षा के
लिए विश्व-विद्यालय,
च्वसलजमबीदपबए
IIT और
प्प्ड खोले
जाने जैसे
क्रांतिकारी
क़दम उठाए
गये हैं।
अल्पसंख्यकों
के उत्थान
के लिए
तमाम योजनाएं
शुरू की
गयी हैं।
परमाणु करार
भी किया
है।
किसान हमारे
अन्नदाता
ही नहीं,
बल्कि जीवन-दाता
हैं। उनकी
परेशानियों
को देखकर
हमने इकहत्तर
हज़ार करोड़
रुपये का
कर्ज़ माफ़
कर उन्हें
और उनके
परिवारों
को एक नया
जीवन दिया।
धान और
गेहूं पर
ख़रीद मूल्य
इतना बढ़ाया
है, जितना
पहले कभी
नहीं बढ़ा।
हमारी प्यारी
बहनों की
रक्षा के
लिए कानून
और स्वयं-सहायता
समूहों के
ज़रिए आत्म-निर्भर
बनाया जा
रहा है।
इस तरह
के बहुत
से ऐसे
काम हैं,
उपलब्धियां
हैं, जो
गिनायी जा
सकती हैं।
आज कल कुछ
लोग हम
पर आतंकवाद
के ख़िलाफ़
लड़ाई में
कमज़ोरी दिखाने
का आरोप
लगा रहे
हैं। एक
कहावत हैः
'उल्टा चोर
कोतवाल को
डांटे।' मैं
उनसे पूछना
चाहती हूं,
कि आप लोग
ज+बान से
देश-भक्ति
की बात
करेंगे, आतंकवाद
के ख़िलाफ़
बात करेंगे,
लेकिन कौन-सी
सरकार ने
आतंकवादियों
की मेहमान-नवाज+ी
करके, अफ़गानिस्तान
ले जाकर
छोड़ा? अब
उस समय
के गृहमंत्री,
जो आपने
आपको आज
मज़बूत नेता
कहलाते हैं,
कहते हैं
कि यह फ़ैसला
उनकी जानकारी
में नहीं
था। जबकि
उस समय
के प्रधानमंत्री
और विदेशमंत्री
ने स्पष्ट
रूप से
कहा कि
उन्हें सब
कुछ जानकारी
थी। इससे
साफ़ ज़ाहिर
होता है,
कि उस समय
के गृहमंत्री
सच नहीं
बोल रहे
हैं। अगर
उनमें सचाई
थी, तो
इस बड़े
षड़यंत्र के
ख़िलाफ़ जो
प्रधानमंत्री
और विदेशमंत्री
ने उनके
पीछे रचा
तो इस्तीफ़ा
क्यों नहीं
दिया। सचाई
क्यों छिपा
रहे हैं?
इन सभी
को इसका
जवाब देना
चाहिए। ऐसे
लोग किस
मुंह से
हमारे ऊपर
आतंकवाद के
ख़िलाफ़ नरमी
का आरोप
लगा रहे
हैं?
हम
सख़्ती से
उसका मुक़ाबला
कर रहे
हैं, लेकिन
वह बताएं
हमें, क्या
आतंकवाद से
लड़ते हुए
इंदिरा जी
और राजीव
जी की तरह
उनका भी
कोई नेता
शहीद हुआ
है?
बहनो
और भाइयो,
राजनीतिक
पार्टियों
और सरकारों
को अपने
उसूलों के
आधार पर,
अपने कामों
के आधार
पर जनता
से समर्थन
मांगना चाहिए।
हम उनमें
से नहीं
हैं, जो
लोगों की
भावनाएं भड़काकर
समाज में
भेद-भाव का
ज़हर घोलकर
अपनी कुर्सी
के लिए
समर्थन जुटाने
की कोशिश
करते हैं।
हमें अपने
उसूलों, अपने
कामों के
आधार पर
आपका समर्थन
चाहिए। हमें
अपनी निष्ठा
और सेवा
के आधार
पर आपका
समर्थन चाहिए।
इस चुनाव
का जो भी
नतीजा होगा,
उसका असर
पूरे देश
के भविष्य
पर पड़ेगा,
एक-एक आदमी
की ज़िंदगी
पर पड़ेगा।
इसलिए मेरा
आपसे अनुरोध
है, कि
इन सब बातों
को ध्यान
में रखकर
फ़ैसला करें,
अपना एक-एक
वोट कांग्रेस
को देकर,
देश और
कर्नाटक का
भविष्य उज्ज्वल
बनाएं।
इन्हीं शब्दों
के साथ
मैं आप
सबको इस
सभा में
आने के
लिए धन्यवाद
देती हूं।
जय-हिंद।
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