चुनाव 2009

 

कांग्रेस अध्यक्ष का भाषण

जनसभा

बीदर-कर्नाटक

15 अप्रैल, 2009

 

 

बुजुर्गो, बहनो और भाइयो,

       आज मैं चुनाव के मौक़े पर आपके बीच आयी हूं। आपसे कांग्रेस के लिए जनादेश मांगने आयी हूं। आपको फ़ैसला करना है, कि अगले पांच सालों के लिए भारत को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। फ़ैसला करने से पहले आप हमारे कुछ सवालों को अपने दिल में ज़रूर रखें। जैसे किः

       देश को आज़ाद किसने करवाया? कांग्रेस ने।

       पूरे देश में उद्योगों, कारखानों, बड़े-बड़े पुल, बांध, नहरों का निर्माण, Thermal Power Station Power  Station किसने लगाए? कांग्रेस ने।

       दलितों और आदिवासियों को आरक्षण किसने दिया? कांग्रेस ने।

       देश के बैंकों का राष्ट्रीयकरण किसने किया। कांग्रेस ने।

       हरित-क्रांति कौन लाया? कांग्रेस ने।

       पंचायत-राज संस्थाओं में महिलाओं को नेतृत्व का मौक़ा किसने दिया? कांग्रेस ने।

       गांव-गांव में टेलीफ़ोन, जगह-जगह कम्प्यूटर के सपने को किसने सच बनाया? कांग्रेस ने।

       सांप्रदायिकता से लड़ने वाले गांधी जी, इंदिरा जी, राजीव जी जैसे बलिदानियों को देश के लिए आहुति पर किसने चढ़ाया? कांग्रेस ने।

       देश में परमाणु शक्ति और ऊर्जा को किसने साकार बनाया? कांग्रेस ने।

       देश के दुश्मनों को हरा कर दुनिया का नक्शा किसने बदल डाला? कांग्रेस ने।

       इसी तरह जब से केंद्र में डॉ0 मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में हमारी सरकार बनी, उसने तमाम ऐतिहासिक योजनाओं और कार्यक्रमों की शुरुआत की, मिसाल के तौर पर देश भर में राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना लागू किया। किसान भाइयों के इकहत्तर हज़ार करोड़ रुपये के कर्ज़ माफ़ किए और उनकी उपज का मूल्य इतना बढ़ाया, जितना पहले कभी नहीं बढ़ा। स्कूलों में पंद्रह करोड़ बच्चों को दोपहर का भोजन मिल रहा है। अक्लियतों के उत्थान के लिए पहली बार अलग से मंत्रालय  और सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशों पर अमल हो रहा है। उनके बच्चे, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के बच्चों को Scholarship दी जा रही है। महिलाओं के हित में तमाम योजनाएं शुरू की हैं। भारत-निर्माण के माध्यम से गांवों और जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के माध्यम से शहरों का बुनियादी ढांचा मज़बूत किया जा रहा है। परमाणु करार किया, जिससे गांव-गांव, घर-घर में बिजली पहुंच जाए, तेज़ी से विकास हो।

       एक तरफ़ कांग्रेस है, जिसने सबको साथ लेकर विकास का रास्ता अपनाया है, तो दूसरी तरफ़ ऐसे लोग हैं, जो अपने निजी स्वार्थ के लिए,

सांप्रदायिक नज़रिए और भड़काऊ बातों के ज़रिए सत्ता तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

       आज हमारे सामने दोहरी चुनौती है। हमें सीमापार से आने वाले आतंकवाद का मुक़ाबला भी करना है और खुद अपने देश की फ़िरकापरस्त ताक़+तों का भी। उन चुनौतियों का मुक़ाबला हम एक होकर, सबको मिलकर करना है। आज भाजपा के जो नेता आतंकवाद से लड़ने की बातें करते हैं, उनके शासन काल में क्या हुआ था, देशवासी भूले नहीं हैं, उन्हें सब याद है।

 

       वह नेता हमारे प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी पर उल्टे-सीधे इल्ज़ाम लगा रहे हैं। शायद उनके लिए मज़बूत नेता उसे कहते हैं, जिनके गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री रहते हुए हमारी संसद् के अलावा एक के बाद एक आतंकवादी हमले हुए, और जो पकड़े गये ख़तरनाक आतंकवादियों को जेल से निकाल कर मेहमान की तरह कंधार भेज सकता हो।

       मगर हमारे लिए तो मज़बूत नेता की परिभाषा अलग है। हम समझते हैं, कि मज़बूत नेता वह है, जो बड़ी-बड़ी बातें नहीं, बड़े-बड़े काम करता हो। यह गर्व की बात है, कि हाल ही में हुए मुंबई हमले के दौरान हमारी सरकार ने जो कूट-नीतिक दबाव बनाया, उसके कारण पाकिस्तान को सच को मानना पड़ा। हम भारत के ख़िलाफ़ होने वाली कोई भी हरकत बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री जी पर और कांग्रेस पर बेबुनियाद और झूठे इल्जाम लगाकर कुछ लोग और नेता सोचते हैं, कि जनता को गुमराह कर लेंगे। पर जनता जागरूक है। वह सब कुछ समझती है। आप उनका मज़ाक उड़ाइए। ऐसे लोगों की ज+बान का कोई भरोसा नहीं है, आज कुछ कहते हैं, कल कुछ और, वह भी क्या करें, ये लोग यह भी कहते हैं, कि डॉ0 मनमोहन सिंह जी अपने आप कोई फ़ैसला नहीं ले पाते हैं, ही ले सकते हैं। क्या ये लोग अपने मन और सोच से कोई फ़ैसला लेते हैं या ले सकते हैं? जी नहीं। किसी भी फ़ैसले के लिए वे एक ख़ास संगठन की तरफ़ देखते हैं, उसके आदेश पर चलते हैं। उसके डर के मारे, अपनी कुर्सी को बचाने के लिए, वे हर क़दम, हर बात के लिए एक ख़ास संगठन की गुलामी करते हैं। आडवाणी जी ने कहा कि च्तपउम डपदपेजमत ब्वदेजपजनजपवदंस व्पिबम से ऊपर कोई नहीं हो सकता। तो सही बात है, मैं भी यह मानती हूं, लेकिन जिस संगठन के इशारे पर भाजपा-NDA सरकार के दौरान और आज भी ये लोग चलते हैं, क्या वह कोई संवैधानिक संस्था है? कोई संवैधानिक ।नजीवतपजल है?

आप सबको याद होगा, वही नेता जो अपने आपको मज़बूत नेता कहता है, वह पाकिस्तान जाता है और जिन्ना को Secular Certificate देता है। वापस आने पर उसी संगठन ने इतना बड़ा तूफ़ान खड़ा किया कि मज़बूत नेता को अपने पद से जाना पड़ा। यही नहीं, उसे लंबा वनबास भी झेलना पड़ा, सिर्फ़ उस संगठन के मुखिया के पैरों पर बार-बार मत्था टेकने के बाद ही, उसे फिर से पार्टी में काम करने की इजाज+त मिली। आप फ़ैसला करें, कि कौन मज़बूत नेता है? आडवाणी जी या प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह जी? लेकिन एक बात मैं स्पष्ट कहना चाहती हूं, कि प्रधानमंत्री किसी पार्टी का नहीं, पूरे देश का होता है। जब वह प्रधानमंत्री का अपमान करते हैं, पूरे देश का अपमान करते हैं। मगर सच तो यह है, कि उन लोगों ने देश के मान-अपमान का पहले भी कब ध्यान रखा है, जो अब रखेंगे!  

       हमारा देश अनेकता में एकता का देश है, हमें सबको साथ लेकर चलना है। जिन्हें कम अवसर मिले हैं, उन्हें अवसर देने हैं। इसीलिए हमने समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है।        

       दूसरे राज्यों की तरह कर्नाटक को भी केंद्र से हज़ारों करोड़ रुपये यहां की समस्याओं को हल करने के लिए, विकास के कामों के लिए दिए गये हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ने उन पैसों का कहां इस्तेमाल किया, उसका पता ही नहीं। ग़ैर-कांग्रेसी पार्टियों ने अपने निजी स्वार्थ की राजनीति के लिए इस महान् प्रदेश को जिस दशा में पहुंचा दिया है, उसे देखकर हमें और आपको तक़लीफ़ होती है। कुशासन के कारण, समाज के सभी वर्गों के लोग परेशान हैं। सिर्फ़ कुछ ख़ास लोगों की जेबें भरने का काम हो रहा है। चारो तरफ़ भ्रष्टाचार का बोल-बाला ही नहीं, बल्कि सारी सीमाएं टूट चुकी हैं। कानून और व्यवस्था ख़त्म हो गयी है। लगता है, सिर्फ़ पैसे के बल पर शासन चल रहा है।

यहां की प्राकृतिक दौलत को नष्ट ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसे कौन कितना लूट सके, इसमें ज़बरदस्त ब्वउचमजपजपवद है।   देश इस तरह नहीं चलता, देश इस तरह आगे नहीं बढ़ता। देश की शक्ति के लिए, राजनीतिक स्थिरता के लिए, मज़बूत सरकार चाहिए, दूर-दर्शी नेतृत्व चाहिए, अनुभव, योग्यता और ईमानदारी चाहिए। यह सब कांग्रेस पार्टी में हैं, डॉ0 मनमोहन सिंह जी में है।

       इस समय लोक-सभा के चुनावों पर सबकी निगाह है, क्योंकि वे राष्ट्रीय चुनाव हैं। इस पर आने वाले पांच सालों के लिए सारे देश का भविष्य जुड़ा हुआ है। फ़ैसला आपको करना है। इन चुनावों का जो भी नतीजा निकलेगा, उसका असर सबकी ज़िंदगी पर पड़ेगा।

       इसलिए मेरा निवेदन है कि चुनाव के दिन सही फ़ैसला करके अपना एक-एक वोट कांग्रेस को देकर हमारे सभी उम्मीदवारों को भारी बहुमत से जिताकर, केंद्र में एक स्थायी, मज़बूत और Secular सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।     

       इन्हीं शब्दों के साथ मैं आप सबको दूर-दूर से इस सभा में आने के लिए धन्यवाद देती हूं। 

       जय-हिंद।

 


 
 

 

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