राजीव गांधी की 66वीं जन्म तिथि
के अवसर पर वीर भूमि
नई दिल्ली पर आयोजित समारोह
20 अगस्त 2010
 

सम्मेलन
वीर भूमि पर एकत्रित अतिथियों का स्वागत
राजस्थान के अलगोज़ा संगीत से किया जाता है।
सुनें

धरती माता को नमन
झारखंड की उरांव जनजाति के गायक
प्रकृति के सौंदर्य को सराहते हुए धरती मां को
अपने घर और मन में आह्‌वान करते हैं।

एका तरते चाला आयो बरचा
बार दई गो मोजरा नानोत रे-----
सुनें

जनम पे बधाई
राजस्थान के पारम्परिक मांगणियार समुदाय की महिलाऐं
बाल जन्म के अवसर पर नवजात शिशु की
दीर्घायु की कामना करती हैं।

बड़भागण जल्मयो हालरियो
हालरियो घणो जीये सा-----

पश्चिम बंगाल के पारंपरिक बाउल लोकगायक
मधुर स्वरों में नवजात के लालन पालन की कामना करते हुए
उसके घर को आशीष देते हैं।

ओ दीदीलो! खोका होयछे ना खुकी होयछे
ढाक ढोल निये तारा नाच्ते ऐसेछे-----
सुनें

नए जीवन का पोषण
असम की बोडो जाति अपने धार्मिक सिजऊ पेड़
को पूजते हुऐ, उनसे नवजात की रक्षा एवं पालन की प्रार्थना करते हैं।

फै आफा बोराया बाथै
फै-----फै-----
सुनें

स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की आवाज़ में
प्रकृति के साथ सद्भाव के संदर्भ में स्वर्गीय नेता द्वारा कुछ शब्द
जो आज भी उनके दूरगामी विचार को सार्थक करते हैं।
सुनें

विद्यार्थियों द्वारा समर्पण
दो युवा भारतीय, हर्षित होकर तिरंगा फहराये हुए
समाधि की परिमा लेते हैं, साथ ही 66 अन्य विद्यार्थी
उत्साहित होकर छोटे छोटे झंडे लहराते हैं।
सुनें

 


 

Sitemap              Search              Feedback

© Copyright AICC 2009 | Privacy policy. Best viewed with IE 5 + browsers at 1024 X 768 resolution.